विनाश काले विपरीत बुद्धि | vinash kale viprit buddhi

शास्त्रों में एक श्लोक का प्रयोग किया जाता है जो विनाश काले विपरीत बुद्धि है इसका सामान्य अर्थ यह है कि विनाश के समय मनुष्य की बुद्धि विपरीत दिशा में चलती है

उसकी बुद्धि उसके विनाश की ओर उसे ले जाती है उसे उचित मार्ग नहीं दिखलाती है।जिस समय सज्जनों की बात जब हमें बुरी लगती है और दुष्टों की बात अच्छी लगती है

तब उसका विनाश निकट होता है।उसे मूर्ख व्यक्ति की बात ही अच्छी लगती है क्योंकि उसका विनाश निकट होता है जब कभी भी व्यक्ति को अपनों की बात समझ में नहीं आती है (vinash kale viprit buddhi)

तब उसका विनाश काल प्रारंभ हो जाता है। जैसा कि रावण का भी विनाश उसकी बुद्धि विपरीत दिशा में गमन करने के कारण हुई थी उसका विनाश निकट था

इस कारण उसकी बुद्धि उसे सही मार्ग नहीं दिख ला रही थी इसलिए उसने माता सीता का अपहरण किया और राम के हाथों मारा गया क्योंकि उसका विनाश नीकट था

vinash kale viprit buddhi
vinash kale viprit buddhi

माता सीता उसके विनाश का कारण बनी इसीलिए तो कहा जाता है कि विनाश काले विपरीत बुद्धि। जैसे दुर्योधन की मृत्यु से पहले उसकी बुद्धि ने काम करना बंद कर दिया था

उसके दिमाग में गलत करने के ही विचार आ रहे थे उसे अपने गुरुजनों माता-पिता की बात सुनाई नहीं दे रही थी उसे केवल गलत मार्ग ही दिख रहा था क्योंकि उसका विनाश निकट था

इसीलिए तो उसने माता द्रोपती का चीर हरण किया बाद में पांडवों के हाथों मारा गया उसकी मृत्यु उसकी बुद्धि के विपरीत दिशा में चलने से हुई क्योंकि उसे सही गलत का फर्क नहीं दिख रहा था

उसे सिर्फ गलत ही गलत दिख रहा था जो उसे सही लग रहा था क्योंकि उसका विनाश आ गया था इसलिए उसकी बुद्धि नहीं कार्य करना बंद कर दिया था और उसकी मृत्यु हो गई थी

।जैसे हिना कश्यप का विनाश निकट आया तब उसकी बुद्धि उसे अनुचित मार्ग दिखा रही थी उसने भगवान को मानना बंद कर दिया और भगवान से ऊपर खुद को मान लिया क्योंकि उसका विनाश आ गया था

विनाश काले विपरीत
विनाश काले विपरीत

इसलिए उसकी बुद्धि उससे गलत मार्ग पर चलने के लिए बादय कर रही थी। उसने भक्त प्रल्हाद की मृत्यु के लिए अनेक प्रयत्न किए क्योंकि वह भगवान का नाम लेता था

और हिरण्यकश्यप उसके मुख से अपना नाम सुनना चाहता था। अंत में उसका भी नाश हो गया यह सभी विनाश के निकट होने के संकेत होते हैं जब हमारी बुद्धि विपरीत दिशा में गमन करती है

हमारी बुद्धि हमारी बात नहीं सुनती हमें गलत मार्ग पर चलाती है दूसरों की नजरों में हमें दोस्त बना देती है और अंत में नाश हो जाता है शास्त्रों में भी विनाश काले विपरीत बुद्धि श्लोक का प्रयोग किया गया है

देखा जाए तो वर्तमान समय में भी कुछ ऐसे उदाहरण प्रस्तुत हैं जिन का विनाश निकट है और वह गलत कार्य करते ही जा रहे हैं। विनाश के समीप होने के कारण बुद्धि व्यक्ति से अनेक गलत कार्य करवाती है

उसे समाज में नीचा दिखाने की परयतन करती है। और गलत कार्य करने पर भगवान द्वारा उस व्यक्ति का विनाश कर दिया जाता है क्योंकि व्यक्ति समाज के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है

उस व्यक्ति के प्रकोप से समाज को बचाने के लिए यह करना आवश्यक है। जब हम कोई गलत कार्य करते हैं तब हमें सच्चेत हो जाना चाहिए। कि अब हमारा विनाश निकट है

अब हमारे पापों का घड़ा भर चुका है अब उसका हिसाब होगा।उसका विनाश अवश्य होगा क्योंकि उसके कर्मों के द्वारा लोगों को पीड़ा हुई है। जो दूसरों को दुख देने लगता है

अर्थात उसे सही मार्ग नहीं दिख रहा है वह दूसरों पर अत्याचार करता रहता है और अंत में उसका सर्वनाश हो जाता है इसीलिए तो कहा जाता है विनाश काले विपरीत बुद्धि

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