रावण की उम्र कितनी थी

आज हम बात करेंगे रावण के बारे में रावण कौन था रावण से देवता क्यों डरते थे तो चलिए आज हम रावण के बारे में आपको कुछ बताते हैं। (रावण की उम्र कितनी थी)
हिंदू धर्म का प्रसिद्ध ग्रंथ रामायण रावण के बिना अधूरी होती।रामायण में रावण बहुत शक्तिशाली पात्रता था।

तीनो लोक की सभी देवता रावण से बहुत डरते थे।क्योंकि रावण अत्यंत बलशाली था।रावण के बल का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है

रावण ने नौ ग्रहों को बंदी बनाकर अपने पास रखा था।कहते है कि समय भी रावण की इच्छा से ही चलता था। कहने को तो रावण लंका का राजा था

लेकिन रावत ने अपने राज्य का विस्तार लंका से इंडोनेशिया मलेशिया वर्मा दक्षिण भारत के भागों में दूर-दूर तक किया था।रावण ने अपने राज्य का विस्तार कई द्वीपों तक भी कर रखा था। ओर आज से 5000 क्षेत्र ईसवी पूर्व राम के द्वारा रावण का वध हुआ था।

ravan ki umar kitni thi

रावण मैं अनेक गुण थे। रावण शाश्वत ब्राह्मण पलतसय ऋषि का पोत्र था। और विश्रवा का पुत्र था। रावण महादेव का परम भक्त था। रावण एक राजनीतिक पराक्रमी महा साक्षी योद्धा था ।

शास्त्रों वेदो का प्रखर ज्ञानी था।रावण महा पंडित महा ज्ञानी व्यक्ति था।रावण ने अपने महल को स्वर्ण से बनवाया था इसी कारण लंका को सोने की लंका कहा जाता है।रावण के 10 सिर थे इसी कारण रावण को दशानद भी कहा जाता है।

रावण ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए अपने 10 सिर उनके चरणों में अर्पित कर दिए थे।इससे महादेव प्रसन्न हो गए

और रावण को कई वरदान दिए।रावण ने अपनी माता के प्राण वर्ष पर ब्रह्मा की तपस्या करना प्रारंभ किया उसने ब्रह्मा की कठोर तपस्या की जिससे ब्रह्मा प्रसन्न होकर रावण को वरदान दिया।

रावण ने ब्रह्मा की 10000 सालों तक कठोर तपस्या की जिसके कारण ब्रह्मा को रावण को वरदान देना ही पड़ा। रावण ने भगवान ब्रह्मा से वरदान लिया कि कोई देवता किन्नर गंधर्व या राक्षस मुझे मारने सके।

मनुष्य को रावण कीड़े मकोड़ों की तरह मानता था इसीलिए उसने वरदान लेते समय मनुष्य का नाम नहीं लिया इसी कारण भगवान विष्णु को धरती पर अवतार लेना पड़ा।रावण एक तांत्रिक व्यक्ति था

वह अनेकों प्रकार की तांत्रिक विद्या जानता था। वह काल को अपने बस में करना चाहता था।अब बात आती है रावण की उम्र के बारे में वैसे तो रावण की राम की उम्र का रामायण में कोई भी वर्णन नहीं किया गया है

लेकिन उनके शासनकाल से हम रावण की उम्र का सिर्फ अंदाजा ही लगा सकते हैं रावण 111 वर्ष तक जीत रहा था।

लगभग 8000 वर्षों तक रावण ने लंका पर राज किया था। और 10000 वर्षों तक अपने भाइयों के साथ मिलकर भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की थी।

जब रावण कैलाश को लंका ले जाना चाहता था तब भगवान शिव क्रोधित होकर उन्हें कैलाश के नीचे ही दबा दिया तब रावण 1000 वर्ष तक भगवान शिव से क्षमा याचना करता रहा। इसी समय रावण ने शिव तांडव की रचना की थी।

रावण का जन्म त्रेता युग के अंत में हुआ था रावण 40000 वर्ष तक जीवित रहा था।अब बात आती हैं रावण के चरित्र की देखा जाए तो रावण अच्छे चरित्र का व्यक्ति था।

उसने माता सीता का अपहरण किया था लेकिन जितने दिन माता सीता रावण के पास रही उन दिनों में माता सीता को रावण ने किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी नहीं

इन दिनों में माता सीता को रावण ने कुछ गलत कहा नहीं कुछ गलत किया यहां तक की रावण ने माता सीता को लंका में छुआ तक भी नहीं था।
अब बात आती है

रावण के ज्ञान की कहते हैं कि रावण के जैसे कोई बुद्धिमान व्यक्ति नहीं था रावण चारों वेदों का ज्ञाता था वह परम ज्ञानी महाबल चाली महा पराक्रमी व्यक्ति था उसकी माता राक्षस जाति से थी और उसके पिता ब्राह्मण जाति से थे

तो रावण में राक्षस और देवता दोनों के ही गुण विद्यमान थे।रावण ने मरते समय कहां था की जिसके पास भाई का साथ होगा वह सफलता हासिल कर सकता है।

जिसके पास भाई का साथ नहीं होगा अगर उसका भाई उसका दुश्मन बन जाएगा तो वह कुछ नहीं कर सकता उसे सफलता नहीं मिलेगी।

वर्तमान में देखा जाए तो भाई भाई आपस में संपत्ति के लिए लड़ते रहते हैं। जो भाई साथ में रहते हैं वह सफलता को प्राप्त करते हैं।

तो यह था रावण के जीवन का छोटा सा परिचय आज इस टॉपिक से हम विदा लेते हैं और मिलते हैं अगले टॉपिक पर

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