रावण के पिता का नाम क्या था | ravan ke pita ka naam

रामायण का अत्याधिक बलशाली पात्र जिसने तीनों लोगों पर विजय प्राप्त की हुई थी जिनका नाम लंकापति रावण था उनके पिता का क्या नाम था? (ravan ke pita ka naam)

लंकापति रावण के पिता का नाम महाराजा विश्वश्रवा था वह अपने बेटे के नाम से जाने जाते थे लंकापति रावण का 9 ग्रहों पर विजय प्राप्त किया हुआ था

और सभी देवता लंकापति रावण से भयभीत हो कर अपना साम्राज्य छोड़कर भाग जाते थे रावण के अत्याधिक बलशाली होने के कारण रावण के पिता विश्वश्रवा के साथ भी कोई युद्ध नहीं करना चाहता था

रावण की माता का नाम केसकी था केसकी विश्वश्रवा की दूसरी पत्नी थी और उनकी पहली पत्नी इलाविडा था
रावण का जन्म कहां हुआ

ravan ke pita ka naam
ravan ke pita ka naam

रावण का जन्म क ग्रेटर नोएडा से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर
शिव पुराण गांव में हुआ था
विश्वश्रवा की दूसरी पत्नी से रावण के सगे 6 बाई बहन थे खर दूषण कुंभी अहिरावण और कुबेर रावण के सगे भाई बहन नहीं थे विभीषण कुंभकरण स्वरूपनाखा यह रावण के सगे भाई बहन थे
रावण की तीन पत्नियां थी

रावण की पहली पत्नी मंदोदरी जो कि राक्षस राज मयासुर की पुत्री थी और उनकी दूसरी पत्नी का नाम दमयमालिनी था और तीसरी पत्नी का नाम किसी भी ग्रंथ में उल्लेखित नहीं है

उसकी दूसरी पत्नी से रावण को 3 पुत्र प्राप्त हुए थे और कहा जाता है कि रावण ने की अपनी तीसरी पत्नी की हत्या की थी

अक्षय कुमार’ मेघनाथ महोदर प्रहस्त भिक्म भीकम वीर विरुपाक्ष प्रहसथा देवताका नंरातका रावण के 11 पुत्र थे यह है उनके नाम कहते हैं कि उनकी दूसरी पत्नी से उनको एक भी पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई थी

कुबेर रावण से बड़ा होने के कारण कुबेर को लंका का राजा बनाया जाने वाला था कुबेर विष्णु का प्रतिनिधि होने के कारण यक्ष संस्कृति की अपनाए रखना चाहता था और फिर विश्रवा के आदेश पर कुबेर ने लंका छोड़ दी

और रावण को श्री विश्वा जी के आदेश पर लंका का राजा बना दिया गयारावण का वध श्री राम ने किया श्री राम को तो आप जानते ही होंगे

श्री राम ने रावण का वध अपनी पत्नी सीता को पाने के लिए रावण का वध कर दिया था
रामायण। महा ऋषि वाल्मीकि के द्वारा लिखी गई

संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है जिसका हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान है इसके 24000 श्लोक हिंदू समृद्धि का वह अंग है

जिसके माध्यम से वंश के राजा श्री राम की गाथा कही गई है और इसे बाल्मीकि रामायण भी कहा जाता है दोस्तों इस रामायण के साथ अध्याय हैं जो कांड के नाम से जाने जाते हैं

दोस्तों महा ऋषि वाल्मीकि द्वारा रामायण की रचना काल के बारे में बात करें तो दोस्तों कुछ भारतीय द्वारा यह माना जाता है

यह महाकाव्य 600 ईसवी पूर्व पहले लिखा गया था उसके पीछे युग जोकि महाभारत इसके पश्चात आया है बौद्ध धर्म के बारे में मौन है

याद भी उसमें जैन शेव पशुपत आदि अन्य परंपरायो का वर्णन है अतः दोस्तों रामायण गौतम बुध के काल के पूर्व का होना चाहिए

इस तरह से अनेकों रामायण ओं की रचनाएं हुई है दोस्तों महा ऋषि वाल्मीकि के द्वारा रची रामायण के ७ सात अध्याय हैं जोकि कांड के नाम से जाने जाते हैं

यह सातों कांड है बालकांड अयोध्या कांड सुंदरकांड युद्ध कांड अरण्यकांड किष्किंधा कांड उत्तरा कांड इसी प्रकार महर्षि बाल्मीकि ने इन सातों कांडों को अलग-अलग में कांडो है

या निबंध किया है

मैं उम्मीद करता हूं आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा होगा तो मित्रो मिलते हैं अपने अगले आर्टिकल के साथ

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