Raskhan biography in hindi | रसखान के सवैये अर्थ सहित

raskhan biography in hindi एक समय की बात है एक पठान जिसका नाम रसखान था वह एक पान वाले की दुकान पर जाया करता था उसे पान खाने की आदत थी एक दिन उसकी नजर दुकान में लगे भगवान श्री कृष्ण के चित्र पर गई

भगवान की उस फोटो को देख कर रसखान मंत्रमुग्द हो गया और अपनी सुध बुध खो बैठा उसने फोटो में भगवान श्री कृष्ण का ऊपर का सारा शृंगार देखा फिर अचानक उसकी नजर भगवान के पेरो पर पड़ी तो चित्र बनाने वाले ने वह चित्र में

रसखान का जीवन परिचय

भगवान को बिना जूती के एक पत्थर पे भगवान को खड़े हुए दिखाया ये देखके रसखान की आँखों में पानी आ गया वो बोला भाई क्या यह बालक वास्तव में है तो पान वाले ने कहा हां ये हमारे बांके बिहारी है जो मथुरा जी में रहते है तो रसखान ने कहा इस बालक की

रसखान

मोहनी मूर्त है पर इसके पैर बिना जुती के है तुम मुझे इनका रास्ता बता दो में इन्हे जूती पहनाएं बिना नहीं रह सकता तो पान वाले ने भी सोचा की ये मजाक कर रहा है तो उसने भी मजाक करने की सोची और उसे द्वारिकाधीश का रास्ता बतला दिया उस पान वाले को क्या पता था की भगवान अपनी लीला करना चाहते है फिर क्या था रसखान उसी वक्त जूती खरीदी और चल पड़े भगवान श्री कृष्ण को पादुका पहनाने

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raskhan biography in hindi
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उस समय कोई बस या अन्य साधन तो थे नहीं रसखान चले पेडल ही रस्ते में लोगो से पूछते की बांकेबिहारी जी कहा रहते है और लोग उन्हें द्वारिकाधीश का मंदिर बतला देते जैसे जैसे रसखान दुरी तय करते जाते वैसे वैसे उनके मन में काना से मिलने की और

raskhan ke dohe

रसखान अपने आराध्य कृष्ण और उनकी ब्रजभूमि के प्रति प्रेम प्रकट करने के लिए क्या क्या उदाहरण देते हैं?

“मानुस हौं तौ वही ‘रसखान’ बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन। जो पसु हौं तौ कहा बस मेरौ चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥ पाहन हौं तौ वही गिरि को जो धरयो कर छत्र पुरंदर धारन। जो खग हौं तो बसेरौ करौं नित कालिंदी कूल कदंब की डारन॥; raskhan ke savaiye

रसखान के सवैये अर्थ सहित

अर्थ – अगर रसखान आगे जन्म में मनुष्य हो तो ब्रज का ग्वालबाल हो
जो पशू होऊं तो नन्द बाबा की गाय बनु जो नन्द बाबा की गाय के बिच में चरु अगर पहाड़ होउ तो उसी पहाड़ का एक टुकड़ा बनु जो श्री कृष्ण ने अपनी ऊँगली पर उठाया था अगर में पक्षी होऊ तो कालिंदी के वृक्ष की डालियो पर मेरा बसेरा हो क्या बात है रसखान की जय हो

भी आतुरता बढ़ती जाती उनके मन में एक ही पश्चाताप होता की कितना कोमल बालक है उसके पेरो में कांटे लगे होंगे में जल्दी से जाके उन्हें जूती पहना दू रसखान रुकना चाहते तो भी रुक नहीं पाते वे बिना खाये पिए निरंतर चले जा रहे थे उन्हें लगता था में जितनी देर से पहुँचूँगा उस श्यामसुन्दर के पैर उतने ही छलनी होंगे 2 -3 दिन में उनका शरीर निरंतर चलने से दुर्बल हो गया

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वे कभी रास्ते में बेहोस हो जाते फिर उठ खड़े होते और चलने लग जाते ऐसे करते करते रसखान द्वारिकाधीश के मंदिर में पहोच गए और जब अंदर जाने लगे तो पुजारी ने ये कहके उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया की ये तो मुस्लमान है पर पुजारी को क्या पता की श्री कृष्ण धर्म और जाती और गरीब अमीर नहीं देखते वे तो अपना भक्त देखते है उसकी सच्ची लग्न देखते है

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रसखान करते भी क्या वे बाहर बैठ गए और श्यामसुंदर का इंतज़ार करने लगे की कभी तो वो बालक बाहर आएगा और में उसके नंगे पेरो में जुती पहनाउंगा जब सुभह से श्याम हो गई और रसखान काना की राह देख कर व्याकुल होकर मंदिर की सीढ़ियों पर से गिरने लगे तो उन मदन मोहन , श्याम सूंदर को उस फोटो के बालक के रूप में आना ही पड़ा और आकर रसखान को गिरने से बचाया और रसखान की आँख खुली तो देखा वही तस्वीर वाला बालक उन्हें गोद में लिए बैठा है

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तो रसखान की आँखों से पानी रुकता नहीं था और उसने तुरंत श्याम के पैर पकड़ लिए और रोने लगा और श्याम सूंदर ने उन्हें अपने गले से लगा लिया और कहा बाबा क्या मुझे जूती नहीं पहनाओगे तो रसखान ने उस बालक के पैर चूमे और उसे जूती पहनाई और फिर भगवान की कृपा से रसखान को सभी बातो का ज्ञान हो गया और उसके बाद रसखान अपनी पूरी उम्र वही रहे

raskhan biography in hindi और रसखान कवी हो गए जिन्होंने बहुत से पद और कविता भगवान श्री कृष्ण पर लिखे जिसने उस परम् परमेश्वर का दर्शन कर लिया हो उस से क्या छिप सकता है अब रसखान भक्त रसखान हो चुके थे बोलिये भक्त रसखान की जय!

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