रामनवमी क्यों मनाते है रामनवमी को क्या हुआ था

रामनवमी
रामनवमी नवमी का त्यौहार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। हिंदू धार्मिक ग्रंथों शास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामजी का जन्म हुआ था।

हिंदू शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में रावण के अत्याचार को खत्म करने और धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक पर श्री राम के रूप में जन्म लिया था।

भगवान श्री राम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को वह माता कौशल्या की कोख से राजा दशरथ के घर हुआ था

‌रामनवमी का त्यौहार हर साल पूरे संसार में अप्रैल या मार्च माह में मनाया जाता है।भगवान विष्णु जीके सातवा अवतार श्री राम के रूप में हुआ था जिनकी जयंती को रामनवमी के नाम से जाना जाता है।

रामनवमी
रामनवमी

महाकाव्य रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियां थी लेकिन कोई भीरानी राजा दशरथ को संतान का सुख नहीं दे पाई थी।

जिसके कारण राजा दशरथ बहुत परेशान रहती थे।पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ को ऋषि वशिष्ठ ने काम इसी यज्ञ कराने का उपाय दिया।ऋषि वशिष्ठ की आज्ञा के अनुसार राजा दशरथ ने यज्ञ करवाया।

रामनवमी

यज्ञ की समाप्ति के बाद ऋषि वशिष्ठ ने राजा दशरथ की तीनों पत्नियों को एक एक कटोरी खीर खाने को दी। खीर खाने के कुछ महीने बाद ही तीनों रानियां गर्भवती हो गई।

इसके 9 महीने बाद राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या की श्री राम जोकि श्री विष्णु जी की सातवें अवतार थी को जन्म दिया

और केकई ने भरत को ओ रानी सुमित्रा लक्ष्मण और शत्रुघ्न जुड़वा बच्चों को जन्म दिया।श्री हरिका अवतार पापियों और अत्याचार को खत्म करने के लिए

इस धरती पर सातवां अवतार श्री राम के रूप में हुआ था।रामनवमी के दिन भगत लोग पवित्र नदी में स्नान कर कर पुण्य के भागी बनते हैं।

हिंदू धर्म श्री राम के प्रति अत्यधिक आस्था और भक्ति है।इसी कारण रामनवमी के त्यौहार को भारत में हर वर्ष बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दिन भगत लोग श्री राम की भक्ति में लीन होकर नृत्य करते हैं भजन करते हैं पवित्र नदियों में स्नान करते हैं दान पुण्य करते हैं।और इसके साथ साथ भगत लोग श्री राम कथा सुनते हैं

और पुण्य के भागी बनते हैं।हिंदू धर्मग्रंथों मैं पवित्र ग्रंथ रामायण का पाठ करवाया जाता है और कहीं कहीं पर तो श्री राम की मूर्ति को झूले में रखकर झुलाया जाता है।

इस भगत लोग श्रीराम की विधि विधान से पूजा करवाते हैं और अयोध्या पहुंचकर सरयू नदी में स्नान करके पवित्र होते हैं।

किसी भी अच्छे कार्य की शुरुआत करने के लिए रामनवमी के दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है।इस दिन भगवान श्री राम की विधि विधान से पूजा करके उनसे जो भी मांगा जाता है

तो यह अपने भक्त लोग की हर इच्छा पूर्ण करते हैं।पूजा के समय राम चालीसा या राम श्लोक का गुणगान करना अत्यधिक भूमिका निभाता है।

इस दिन को अयोध्या वासी तथा अन्य लोग बड़े ही धूमधाम से राम नवमी के त्यौहार को बनाते हैं। जिसके कारण चारों तरफ खुशी का माहौल और वातावरण शुद्ध का से भरपूर रहता

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