रामदेवरा का इतिहास | ramdevra ki kahani

रामदेवरा रामदेव जी राजस्थान में जन्मे एक ऐसे देव है जिनको हर सम्प्रदाय जाती और धर्म का व्यक्ति मानता है चाहे वह हिन्दू हो या मुस्लिम या सिख हो ईसाई यहाँ पर लोग दूर – दूर से आते है तो आइये जानते है की बाबा रामदेव जी ने ऐसे क्या – क्या काम किये और क्या कहानी है

लोकदेवता रामदेव जी की कहानी

ramdevra
रामदेवरा

वर्तमान राजस्थान के जिला जैसलमेर में स्थित पोकरण के राजा अजमल जी थे उन्हें कोई भी संतान नहीं थी इस बात से वे काफी परेशान रहते थे वे जितना

इस बात से परेशान थे उतना ही उन्हें अपने द्वारिकाधिस श्री कृष्ण के भक्त भी थे एक बार गांव वालो की बातो से परेशान होकर अजमल जी द्वारिका जाके वहा के मंदिर के पुजारी को द्वारिकाधीश का पता पूछा उस समय पुजारी परेशान था

उसने अजमल जी को सागर की और इसरा करते हुए कहा की वे इसके अंदर है ऐसा सुनते ही अजमल जी उस सागर में छलांग लगा दी और अपने विश्वास के तोर पर

भगवान ने उन्हें दर्शन दिया और अजमल से कहा की में खुद तुम्हारा पुत्र बनके आऊंगा और वेसा ही हुआ रामदेव जी अजमल के घर अवतार लेके आये और इस लिये बाबा रामदेव जी को श्री कृषण का अवतार कहते है

रामदेवरा

जेसे – जेसे समय बिता तो रामदेव जी ने लोगो को काफी चमत्कार दिखाए चमत्कार को राजस्थान में पर्चा कहते है एक बार बाबा रामदेव ने कपडे के घोड़े को आकाश में उड़ाया उस पर बाबा रामदेव ने सवारी की ये रामदेव की बचपन की बात है

बाबा रामदेव की माता का नाम मेणादे और पत्नी का नाम नेतलदे था गुरु का नाम बलिनाथ था घोड़े का नाम लाली रा असवार था

बाबा रामदेव ने एक भेरव नाम के राक्षस को भी मारा था जो जनता पर अत्याचार कर रहा था

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एक बार रामसापीर की चारो और ख्याति देख कर मका सऊदी अर्ब से 5 पिर आये रामदेव जी की परीक्षा लेने के लिए के रामदेव ने उनका आदर सम्मान किया

और उन्हें भोजन करने की इच्छा जाहिर की लेकिन उन्होंने कहा की हम अपने बर्तन में ही भोजन करते है

जो मक्का में रह गये है तो रामदेवजी ने उन्हें वो बर्तन आकाश मार्ग से वही पर मंगवा देये जिसे देखकर सभी पच पिरो ने रामदेव को पिरो का पीर की उपाधि से नवाजा और उस जगह को पंच पिपली कहते है क्योंकि वहा पर रामदेव ने पांच पीपल के पेड़ लगाये थे

रामदेवरा

बाबा रामदेव को एक पेड़ के निचे एक बची मिली जिसे रामदेव ने अपनी बहन माना उसे डाली बाई कहते है डालीबाई ने अपना पूरा जीवन गरीबो के उथान में लगा दिया

रामदेव जी का मेला कब से कब तक लगता है?

रामदेव जी की समाधि रुणेचा धाम में है समाधि के कुछ समय बाद वहा पर रामदेव जी का मंदिर बना और वहा पर मेला लगता है माघ की दसमी और भादवा की दशमी को बड़ा मेला लगता है

रामदेवरा कितना किलोमीटर है

अगर आप भी रामदेवरा राजस्थान में जाना चाहते है तो आप यहाँ पर क्लिक करके देख सकते है की रामदेवरा कितना किलोमीटर दूर है अगर आप सर्च कर रहे है की


जोधपुर से रामदेवरा कितना किलोमीटर है तो 3 hr 4 min (182.6 km) via NH125 है

आसा करता हु की आपने इस पोस्ट को पढने के बाद संतुष्ट हुए होंगे अगर आपके मन में कोई बात हो तो आप हमे कमेन्ट कर सकते है बोलो रामसा पीर की जय!

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