नरसी जी रो मायरो narsi mehta na bhajan

नरसी जी रो मायरो आप अगर श्री कृष्ण भक्ति में श्रधा रखते है तो आपने नरसी भगत के बारे में तो सुना होगा ही तो आज की कथा में हम आपको बतायेंगे

की भगवान श्री कृषण ने नरसी जी का भात क्यों भरा वो भी इतना की आज तक कोई भी इतना भात या मायरा नही भर पाया भगवान श्री कृष्ण नानी बाई के भाई और रुक्मणि नानी बाई की भाभी बनी थी और भगवान श्री कृष्ण नरसी मेहता के पुत्र बने थे

नरसी जी रो मायरो
नरसी जी रो मायरो

नरसी जी रो मायरो की कथा

भगत नरसी मेहता जी भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त थे नरसी मेहता ना भजन आज भी

ने केवल गुजरात में ही गाए जाते हैं बल्कि संपूर्ण भारत में भी गाए जाते हैं

नरसी मेहता जी जाति से ब्राह्मण थे बचपन में ही वे साधुओं की संगत में रहना पसंद करते थे

उनके हृदय में श्री कृष्ण की भक्ति का भाव उत्पन्न हु

narsi mehta na prabhatiya

वे निरंतर साधु संतों के साथ रहकर श्री कृष्ण और गोपियों की लीला के गीत गाते थे धीरे-धीरे भजन

और कीर्तन में ही अपना जीवन व्यतीत करने लगे उनका ऐसा जीवन परिवार वालों को पसंद नहीं था

परिवार वालों ने उन्हें बहुत समझाया परंतु कोई लाभ नहीं हुआ एक बार उनकी भोजाई ने उन्हें ताना मार कर कहा की ऐसी भक्ति उमड़ी है

तो भगवान से मिलकर क्यों नहीं आते उसके इस गाने ने नरसी जी पर जादू का सा काम किया

narsi mehta na bhajan
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नरसी जी को मेंणा मारना नरसी जी की कथा आगे

वे उसी समय घर से निकल पड़े और पास ही महादेव जी के पुराने मंदिर में जाकर वहां शिवजी की उपासना करने लगे

उनकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शंकर उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें भगवान श्री कृष्ण के और

गोपियों की रासलीला का अद्भुत दृश्य दिखाया तपस्या पूरी कर वह घर गए और अपने बाल बच्चों के साथ रहने लगे

परंतु केवल भजन कीर्तन में ही लगे रहने के कारण बड़े कष्ट के साथ उनके गृहस्थी का काम चलता

स्त्री ने कोई काम करने के लिए बहुत कुछ कहा परंतु नरसी जी पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा

नरसी जी का भात नानी बाई रो मायरो भगवान के द्वारा भरना

उनका दृढ़ विश्वास था कि भगवान श्रीकृष्ण ही उनके सारे दुखों और अभाव को दूर करेंगे जैसा उन्होंने सच्चा वैसा ही हुआ

जब उनकी पुत्री का विवाह हुआ तब जितने रुपयों और अन्य सामग्रियों की जरूरत पड़ी

सब भगवान ने ही उन्हें पहुंचाई और स्वयं मंडप में आकर सारे कार्य पूर्ण किए

इसी तरह पुत्र का विवाह भी भगवान की कृपा से ही संपन्न हुआ नरसी जी मेहता को जाति के लोग बहुत ही तंग किया

करते थे उन लोगों ने कहा कि अपने पिता का श्राद्ध करके सारी जाति को भोजन कराओ नरसी जी ने भगवान को स्मरण किया

और उसके लिए सारा सामान जुट गया श्राद्ध के समय अंत में नरसी जी को मालूम हुआ कि कि घी घट गया है

narsi mehta na bhajan

तब वे बर्तन लेकर बाजार से घी लाने गए रास्ते में उन्होंने संत की मंडली को देखा और वे बड़े प्रेम से हरि कीर्तन करते देखा

तब नरसी जी उनमें शामिल हो गए और घी लाना भूल गए तब उनकी पत्नी बड़ी व्याकुलता से उनकी बाट देख रही थी

भगत वत्सल भगवान ने नरसी जी का रूप धारण करके घर पर घी लेकर पहुंचे

इसी प्रकार ब्राह्मण भोजन का कार्य संपन्न हुआ बहुत देर बाद कीर्तन के बंद होने पर नरसी जी घी लेकर घर पहुंचे

नरसी की भगवान के द्वारा परीक्षा नरसी भगत रो मायरो

और अपनी पत्नी से देर से आने की समा मांगने लगे तब स्त्री आश्चर्य में डूब गई

पुत्र पुत्री का विवाह करके नरसी जी निश्चिंत हो गए और अधिक उत्साह ऐसे भजन कीर्तन करने लगे

कुछ ही वर्षों के बाद उनके इस्त्री और पुत्र का देहांत हो गया

तब से भी एकदम विरक्त से हो गए और लोगों को भगवान की भक्ति का उपदेश देने लगे

कि भगवान की भक्ति करने से प्राणी मात्र का कल्याण हो जाता है और मुक्ति मिल सकती है

इसीलिए तो पुराणों में कहा गया है कि भगवान की भक्ति ही मोक्ष प्राप्ति का उपाय है

वो सांवरा जिसका हाथ पकड़ लेता है उसके लिए इस संसार में एसी कोई बस्तु नही रह जाती है

जो की अप्राप्त हो और इस से पहली बात तो ये ही है

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जिसको भगवान श्री कृष्ण में सच्ची आस्था हो जाये वो और वस्तु क्यों चाहेगा जेसे हमने आज देखा नरसी जी रो मायरो

नरसी जी का मायरा का भजन

इसमें आपने एक खास बात देखि जेसे प्रह्लाद भगत की कथा,

भगत धुर्व की कथा और इसी प्रकार नरसी भगत की कथा में इनको भगवान ने बिना मांगे इतनी प्रसिद्ध कर दिया

की आज हर भगवान के भगत इनके बारे में जनता है

आप हमे कमेन्ट में ये जरुर बताये की आपको नरसी जी रो मायरो कथा केसी लगी जय श्री कृष्णा

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