जटायु कौन था Jatayu ke bhai ka naam

जटायु कौन था आज जटायु की पूरी कथा हम आपको बतायेंगे इस आर्टिकल के माध्यम से आज के बाद ये तमाम प्रश्नों jatayu ke bhai ka naam

उतर आपके पास होंगे की जटायु कोन था और उसके पिता का क्या नाम थाऔर जटायु का भाई का क्या नाम था तो चलिए आज की जटायु की पूरी कथा की शुरुआत करते है

जटायु कौन था , Jatayu ke bhai ka naam
जटायु कौन था

जटायु कौन था जटायु प्रसंग

भगवान श्री राम लक्ष्मण से कहते है कि है लक्ष्मणसभी प्राणियों को यहां तक कि पशु पक्षियों को भी सहारे की जरूरत होती
है

अर्थात भगवान की जरूरत होती है

वेसे में आपको बताता हु की जटायु कौन था प्रजापति कश्यप के दो पुत्र अरुण और गरुड़, अरुण के दो पुत्र सम्पाती और जटायु(jatayu) थे जटायु भगवान राम के पिता दशरथ के अच्छे मित्र भी थे इसी करण उन्होंने माता सीता को रावण बचाने की कोशिश की थी !

Jatayu ke bhai ka naam

अभी हम आगे की कथा में बताऊंगा की जटायु के भाई सम्पाती के पंख किस कारण जले तो आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़े चलो कथा शुरू करते है

जटायु जन्म

एक बार प्रजापति कश्यप जी की पत्नी विनीता की दो पुत्र हुए थे

अरुण और गुरुड इनमें से भगवान सूर्य के सारथी अरुण जी के दो पुत्र हुए थे संपाती और जटायु बचपन में जटायु का भाई दोनों ने उड़ने की होड़ लगाई थी

और सूर्य मंडल के पास तक चले गए थे सूर्य का तप तेज होने के कारण जटायु तो लौट आए किंतु संपाती ऊपर ही उड़ते रहे

सूर्य के अधिक निकट आने के कारण संपाती के पंख सूर्य के ताप के कारण भसम हो गएवह समुंदर के पास पृथ्वी पर गिर पड़े जटायु लौटकर पंचवटी में रहने लगा

जटायु का भाई कौन था

जटायु महाराज दशरथ का परम मित्र था बनवास के समय जब श्रीराम पंचवटी में पहुंचे तब जटायु से मिले

Jatayu ke bhai ka naam
Jatayu ke bhai ka naam

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जटायु रावण युद्ध jatayu story in hindi

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी ने अपने पिता के सखा को अपने पिता के समान सम्मान कियाजब छल से स्वर्ण मरीग बने

मारीच के पीछे राम जी वन में चले गएतब मारीच के कपट पूर्वक पुकार सुनकर लक्ष्मण जी बड़े भाई को ढूंढने चले गए

तब कुटिया में अकेले सीता ही थी सुनी कुटिया से रावण ने सीता जी को उठा लिया और बलपूर्वक रथ में बैठा कर ले गया

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सीता जी की चीक चीक की पुकार सुनकर जटायु क्रोध से भर गए सीखने की पुकार सुनकर रावण पर टूट पड़े

और उनसे युद्ध करने लगे एक बार तो जटायु ने रावण को धरती पर पटक दिया परंतु उनकी अवस्था रावण के समान नहीं थी

वे वृद्ध थे फिर भी उन्होंने रावण से युद्ध किया अंत समय रावण ने उनके पंख काट दिए और जटायु धरती पर गिर पड़ा

जटायु कौन था राम लक्ष्मण से वह कहां मिला

फिर रावण सीता को लेकर दक्षिण की ओर चला गया तब श्री राम विरह व्याकुल हुएजानकी जी को ढूंढने वहां आए तब जटायु मरने ही वाला था उन्होंने श्रीराम से कहा की है

जटायु राम संवाद

राघव राक्षस राज रावण ने मेरी ऐसी दशा की है वही दुष्ट सीता को हर कर ले गया है

मैंने तो तुम्हारे दर्शन के लिए ही अपने प्राणों को रोक रखा था अब मुझे जाने की आज्ञा दो ऐसा सुनकर श्री राम जी के नेत्र भर आए

जटायु परम भक्त थे उन्हें अपने शरीर का मोह

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जटायु का अंतिम संस्कार

‌ नहीं था उन्होंने कहा श्री राम जिनका नाम मृत्यु के समय मुख से निकल जाए वह प्राणी मुक्ति प्राप्त कर लेता है

श्री राम ने उन्हें अपनी गोद में उठाया और उसके जटाओं में से धूल झार रहे थे तब जटायु ने उनकी गोद में ही शरीर को छोड़ दिया

भगवान श्री राम अपने भगत की परम भक्ति को देखकर सीता जी के वियोग को भी भूल गए थेऔर श्री राम ने जटायु का अंतिम संस्कार अपने ही हाथो से किया था ये कथा सुनकर जो सच्चा भगत है

उसने पूरी पढ़ी होगी और पढ़ी है तो कमेंट में जय श्री राम जरुर लिखिए और साथ ही लिखे की आज की कथा Jatayu ke bhai ka naam कथा आपको केसी लगी!

मिलते है अगली एसी ही रोचक भगवान के भगत की कथा में तब तक जय श्री राम !

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