Janabai | संत जनाबाई जीवन परिचय

janabai संत जनाबाई जैसी माता इस धरा पर कम ही आती है संतो की खासियत कैसी होती और भगवान को संत कैसे लगते है एक बार भगवान राम ने कहा था सुग्रीव से की में अपने भक्तो के लिए बेचैन रहता हु वो मेरे ह्रदय में इस प्रकार बसे रहते है जैसे लोभी के मन में धन बसा होता वैसे मेरे भक्तो के मन में भगवान यानि में रहता हु और मेरे हृयद में मेरे भक्त रहते है

पिछली कहानी में हमने आपको बताया था की जनाबाई को भगवान बुढ़िया के रूप में मिले थे और भगवान ने जनाबाई के लिए उसके काम में हाथ बटाया और कपड़े धोये थे अगर आपने वो कथा नहीं पढ़ी तो यहाँ से पहले वो पढ़ सकते है

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संत जनाबाई जीवन परिचय

जब जनाबाई को पता चला वो श्री भगवान थे तो जाना अब भगवान के भजनो में और व्याकुल होके करने लगी अब तो भगवान जनाबाई का हर काम में हाथ बटाने आने लगे जाना हर काम भगवान के भजन करते हुए करती जब जनाबाई सुध भूल जाती तो कृष्ण स्वयं आके जाना को घर का काम कराते

कभी आटे की चक्की साथ फेरते कभी बर्तन कभी कपड़े कभी बुहारी करते थे एक बार संत कबीर ने सोचा की जनाबाई के चर्चे बोहत सुने है तो क्यों ना उनसे मिलने जाया जाये तभी कबीर जी वहा गये जहा जनाबाई रहती थी जब कबीर पहुचे तो देखा दो महिलाये आपस में गोबर से बनी उबलो या छानो के लिए आपस में लड़ रही है

तभी कबीर को बड़ा ही आश्चर्य हुआ की गोबर के लिए कोई केसे लड़ सकता है अभी कबीर ने जनाबाई के बारे में पूछा तो पता चला की जो महिला लड़ रही है उनमे से एक जनाबाई है तभी कबीर तो और भी अचरज में पड़ गये कबीर ने पास में जाकर जनाबाई से कहा आपके उबले की क्या पहचान है तो जनाबाई ने कहा की मेरे उबलो से बिठल – बिठल की आवाज आती है

तो कबीर ने जेसे ही जनाबाई के उबलो को कान से लगाया तो वे गदगद हो गये वास्तव में उन गोबर से बने उबलो से बिठल – बिठाल की आवाज आ रही थी जनाबाई इतनी महान भक्त थी भगवान की

Janabai एक बार श्री बिठल भगवान के मन्दिर से एक हीरा चोरी हो गया तो उसका इल्जाम जनाबाई पर लगा क्योकि ज्यादा मंदिर में जनाबाई ही जाती थी जब सभी लोग मिलकर जनाबाई को सूली पर चढ़ाने लगे तो जनाबाई बेचेन्न होकर बिठल बिठल पुकारने लगी तो शूली पिंगल गयी और पानी हो गयी इस तो लोगो ने भी मान लिया की जाना बाई कोई साधारण स्त्री नही बल्कि भगवान की भक्त है बोलिए भक्त शिरोमणि जनाबाई की जय!

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