होली की कहानी क्या है

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। मनुष्य किसी ने किसी त्यौहार का प्रेमी रहा है। हमारे भारतीय समाज में समय-समय पर होली की कहानी क्या है

किसी ने किसी त्योहार का आयोजन होता रहा है।जैसे रक्षाबंधन दीपावली दशहरा होली इत्यादि और भी अन्य बहुत से त्यौहार है।

जिससे आपस में मित्रता का भाव भी उत्पन्न होता है।होली का त्यौहार बसंत ऋतु का त्यौहार माना जाता है।होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। परंतु इसका प्रारंभ माघी पूर्णिमा से हो जाता है।

जिसकी अवधि 1 महीने की होती है।संपूर्ण मास में होली के गीतों का आयोजन चलता रहता हैइस त्यौहार के समय मैं तो अधिक गर्मी पड़ती है और ना ही अधिक सर्दी पड़ती है

होली की कहानी क्या है
होली की कहानी क्या है

होली की सच्चाई क्या है

।होली के त्योहार को मनाए जाने के पक्ष में अनेक मत है होली से संबंधित अनेक कथाएं हिंदू समाज में प्रचलित हैं।

जिसमें से सबसे अधिक प्रचलित हैं हर्निया कश्यप और प्रल्हाद की कथा।इसके अनुसार होली का जो कि हर्निया कश्यप की बहन थी वह अपने भाई की आज्ञा मानते हुए प्रह्लाद को अपने गोद में बैठा कर

चिता पर बैठ गई क्योंकि हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद को मारना चाहता था क्योंकि वह अपने पिता को भगवान न मानकर भगवान श्री विष्णु को भगवान मानता था इसीलिए हिरण्य कश्यप अपने पुत्र को जिंदा नहीं देखना चाहता था

प्रह्लाद की मृत्यु के लिए अनेक उपाय किए गए लेकिन उनमें सफलता प्राप्त हुई और फिर उसे आंग से जलाने का सुझाव आया। होली का को वरदान मिला था ब्रह्मा जी से की अग्नि से उसे कोई भी हानि नहीं हो सकती

इसीलिए उसने अग्नि के द्वारा प्रह्लाद को मारना चाहा लेकिन प्रह्लाद की अटूट बत्ती और भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त होने के कारण प्रह्लाद को अग्नि से कोई भी हानि नहीं हुई और होलीका जलकर राख हो गई उस दिन से लेकर आज तक होली मनाने का त्योहार हमारे हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है

।कुछ लोग यह बताते हैं कि प्राचीन समय में यह त्योहार सामूहिक यज्ञ के रूप में मनाया जाता था।जिसमें अन्य की आहुति देकर देवताओं को खुश किया जाता था।आज होलिका जलाते समय उसमें गेहूं की बाल बोली जाती है चने बुने जाते हैं

।इन सभी सामग्री को बुनकर परिवार में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।इस त्यौहार की आगमन से पूर्व ही व्यक्ति एक दूसरे पर रंग डालकर अपना प्रेम प्रकट करने लगते हैं

।प्रत्येक घर में होली के दिन अनेक मिठाईयां अनेक पकवान बनाए जाते हैं सभी लोग अच्छे अच्छे कपड़े पहनते हैं एक दूसरे से मिलते हैं प्रेम से बातें करते हैं और सभी के प्रति अपनतो का भाव प्रकट करते हैं।इस दिन सभी लोग होली के गीत गाते रहते हैं

वैसे तो होली के गीत होली के आगमन से पूर्व ही प्रारंभ कर दिए जाते हैं।होली खेलने के बाद सभी लोग स्वस्थ होकर संपूर्ण वर्ष की द्वेष भाव भेदभाव की भावना को बोलकर सभी से मिलते हैं और अपनत्व का भाव प्रकट करते हैं।हमारा यह कर्तव्य

कि त्योहार के उद्देश्य को समझकर अपन तो के भाव को देखते हुए हर त्यौहार को मनाया जाना चाहिए।होली शांत मन से रहना चाहिए अपने चेहरे पर मुस्कान होनी चाहिए किसी से लड़ाई झगड़ा नहीं करना चाहिए और हर वर्ष अच्छे मन से होली को मनाना चाहिए।
हैप्पी होली।

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