गणेश जी की खीर वाली कहानी ganesh ji ki kheer wali kahani

Ganesh ji ki kheer wali kahani भगवान गणेश की महानता तो बहुत है परन्तु क्या आपको गणेश जीकी कथा ऐसी माल्लूम है जब भगवान विष्णु को भी उनकी जरूरत पड़ी थी आज भी गणेश जी की ऐसी ही कथा हम आपको बतायेंगे

‘गणेश व्रत’ (Ganesh Ji) करुणा के सागर भगवान जीवो पर कृपा करके स्वयं ही उनको अपनाते हैं संसार के नाना प्रकार के रोग शोक जन्म मृत्यु आदि कष्टों में पड़े हुए काम क्रोध लोभ मोह आदि विकारों से अंधे बने हुए

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गणेश जी की कथा कहानी भगवान विष्णु के साथ

जीवो को सही मार्ग पर लाने के लिए और ganesh ji ki kheer wali kahani

उनका ठीक-ठाक कल्याण करने के लिए एक होकर भी वे दयामय अनेक दिव्य मंगलमय रूप धारण करने वाले भगवान गणेश जी हैं

वह अपने आनंदमय जीवन में अनेक लीला करते हैं उनकी लीलाओं का ध्यान करके उनका कीर्तन करके संसार सागर में डूबते हुए इससे पार हो जाते हैं वह परम दयालु है

जीवो का कल्याण करने वाले हैं भगवान के मंगल में लीलाओं की गणना करना संभव ही नहीं है भगवान के अनंत रूप है अनंत लीलाएं हैं श्री गणेश जी को मंगलमयी ही कार्यों के लिए प्रथम पूजा जाता है इस लिए गणेश जी को प्रथम पूजा के लिए प्रथम पूजय या बिगन हरण भी कहा जाता है और कहते है गणेश के जन्म से पहले भी गणेश की प्रथम पूजा की जाती थी

श्री गणेश जी के प्रथम पूज्य होने की अनेक कथाएं हैं अंते उनकी प्रथम पूजा करने से कार्य निर्विघ्न समाप्त होते हैं उस कार्य में कोई वादा नहीं आती उस कार्य को भगवान गणेश स्वयं उपस्थित होकर पूर्ण करते हैं

विष्णु भगवान की शादी

जब सृष्टि के प्रारंभ में देवताओं में प्रथम पूज्य किसे माना जाए यह प्रश्न उठा तब सब देवता ब्रह्मा जी के पास गए और ब्रह्माजी ने उन्हें बताया

कि जो कोई भी पूरी पृथ्वी की प्रदक्षिणा करके सबसे पहले आएगा वही प्रथम पूज्य माना जाएगा सब देवता अपने-अपने वाहनों को लेकर प्रदक्षिणा के लिए चल पड़े गणेश जी का शरीर स्थूल है वह लंबोदर है

उनका वाहन चूहा है देवताओं में अनेकों के वाहन पक्षी है कुछ रथ पर है कुछ अश्व पर है तथा कुछ हाथी पर विराजमान है उन सब के साथ भला गणेश जी कैसे दौड़ लगा सकते हैं

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नारद जी की सम्मति से गणेश जी ने भूमि पर राम, यह भगवान का नाम लिखा और उसी की साथ प्रदक्षिणा करके ब्रह्मा जी के पास पहुंचे सृष्टि के कर्ता ब्रह्मा जी ने उन्हीं को प्रथम पूज्य माना क्योंकि राम नाम तो साक्षात श्रीराम का स्वरूप है

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और श्री राम के रोम रोम में कोटि-कोटि ब्रह्मांड है श्री गणेश जी ने राम नाम की परिक्रमा करके समस्त ब्रह्मांड ओं की परिक्रमा कर ली थी

और कथा में गणेश जी ने भगवान शंकर और पार्वती जी की प्रदक्षिणा की अथारत माता पृथ्वी के समान और पिता प्रजापति के स्वरूप है कल्प वेद में दोनों ही कथाएं सत्य है

गणेश जी की खीर वाली कहानी

आपके लिए हमने हमारे पोस्ट में ganesh ji ki kheer wali kahani कहानी की विडियो को कनेक्ट किया है ताकि इस पोस्ट में हम ये कहानी भी आपको बता सके

Ganesh ji ki kheer wali kahani आसा करते है की आपको आज की कथा में बहुत आनंद आया होगा अगर आपको ये कथा अच्छी लगी तो श्री गणेश जी का नाम लेकर इसे अपने परिवार जनों और दोस्तों में भेजे और साथ में कमेन्ट भी करे जय श्री राम !

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