धन्ना जाट की कथा | dhanna bhagat ki katha fully

धन्ना जाट की कथा आज इतनी मसहुर है की सभी भक्त इनको नमस्कार करते है

इस दुनिया में भगवान के ऐसे – ऐसे भगत हुए है dhanna bhagat ki katha

जिन्होंने श्री भगवान को प्रेम पूर्वक धरती पर उतारा है इन्हें में मसहुर है

जिसमे धना के प्रेम के आगे भगवान को झुकना पड़ा और धना के हाथ से रोटी खानी पड़ी थी!

धन्ना जाट का किस्सा ,धन्ना जाट की कथा
धन्ना जाट की कथा

धन्ना जाट का किस्सा

 धन्ना जाट के पिता साधु सेवी सरल हृदय वाले किसान थे पढ़े लिखे तो नहीं थे

परंतु वे श्रद्धालु थे उनके घर इधर उधर जाते हुए साधु संत आकर एक-दो दिन रह जाते थे

धन्ना जी की उस समय आयु 5 वर्ष थी उस समय एक ब्राह्मण उनके घर आया

उस ब्राह्मण ने कुएं से जल निकालकर स्नान कर लिया

और अपनी झोली में से शालग्राम जी को निकालकर उनकी पूजा तुलसी चंदन धूप दीप आदि

से की ।बालक साधु को ध्यान से देख रहा था

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उन्होंने ब्राह्मण से कहा कि पंडित जी मुझे भी यह मूर्ति दो मैं भी इसकी पूजा करूंगा

जाट के लड़के को शालग्राम तो कौन देने चला था

परंतु बालक ने  हठ करके उस मूर्ति को मांगा परंतु ब्राह्मण ने उसे काले पत्थर का एक टुकड़ा पकड़ा दिया

धन्ना जाट की कथा धन्ना जाट की भक्ति की शुरुआत

और कहा कि लो बेटा यही तुम्हारा भगवान है और तुम आज से इसकी पूजा करो

बालक ने खुशी से उस काले पत्थर के टुकड़े को पकड़ लिया

dhanna bhagat ki katha
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धन्ना जाट

और अपना भगवान मानकर उसकी पूजा करने लगा सवेरे स्नान करके अपने भगवान  को 

चंदन तिलक करता परंतु उसके पास चंदन नहीं होता तो वह मिट्टी का तिलक करता

वृक्ष के हरे हरे पत्तों को चढ़ाता क्योंकि उसके पास तुलसी के पत्ते नहीं थे फूल चढ़ाता और कुछ तिनके जलाकर धूप कर देता

और हाथ जोड़कर दंडवत प्रणाम करता और प्रेम से बैठ जाता दोपहर में बालक की मां ने बाजरे की

रोटी खाने को दी धन्ना जाट जाट ने वे रोटियां भगवान के आगे रखकर आंख बंद कर ली

बीच-बीच में ही आंख खोलकर वह देखता रहा कि भगवान रोटी खाते हैं या नहीं परंतु जब भगवान ने रोटी नहीं खाई

धन्ना जाट की कथा
धन्ना जाट की कथा

धन्ना भगत को भगवान के दर्शन देना

तब इन्होंने हाथ जोड़कर बहुत प्रार्थना की इस पर भी भगवान को भोग लगाते ने देखकर उसे बहुत दुख हुआ उसके मन में यह विचार आया कि

भगवान उसे नाराज हो चुके हैं वह मेरी चढाई हुई रोटी नही खाते भगवान भूखे रहें और मैं रोटी खा लूं

यह नहीं हो सकता ऐसा सोच कर धन्ना जाट ने रोटियां जंगल में फेंक दें

किस प्रकार कई दिन हो गए ठाकुर जी नहीं खाते और तन्ना उपवास करते हैं

दिन प्रतिदिन शरीर दुबला होता जा रहा है

माता पिता को कुछ पता ही नहीं कि उसके लड़के  को क्या हुआ है

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धन्ना भगत को भगवान के दर्शन देना
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धन्ना को सिर्फ एक ही बात का दुख था कि उसके भगवान नाराज है

वे उसकी दी हुई रोटी नहीं खाते इसी प्रकार धन्ना जाट को अपनी भूख का पता ही नहीं

कुछ दिन बाद  जब धना ने रोटियां रखी तो भगवान प्रकट हो गए और वे भोग लगाने लगे

जब भगवान ने आधी रोटी खा ली तब धन्ना ने ठाकुर जी का हाथ पकड़ लिया

और कहां कि तुम इतने दिन क्यों नहीं आए मुझे भूखा मारा और आज आए हो तो

अकेले ही रोटी खा रहे हो मुझे थोड़ी सी भी रोटी नहीं दी बची हुई रोटी को भगवान ने धन्ना को दे दी

प्रेम के भूखे भगवान को धन्ना की रोटियों का स्वाद लग गया

अब वे नियमित रूप से धन्ना की रोटियों का नित्य भोग लगाने लगे

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इसी तरह से धना जाट भगत बना क्योंकि जिसको भगवान वासुदेव के दर्शन हो जाये वो साधारण मनुष्य केसे रह सकता है

भगवान ने तो अपने भगतो के मान बढ़ाने के लिए अपना आधा नाम ही भक्तो को दे दिया

आप देखिये “भगवान ” भग + त भगवान और भगत में पहले दो नामो की समान्ता है!

धना जाट की कथा श्री भगवान में आस्था को और भी गहरी करती है

क्या आपको भी धन्ना जाट की कथा ने दिल को छुआ हमे कमेन्ट में जरुर बताये जय श्री राम!

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