बर्बरीक कौन था barbarik in mahabharat katha

बर्बरीक कौन था क्या आपने श्याम बाबा का नाम तो सुना ही होगा ना जिनका मेला राजस्थान में सीकर जिला के खाटू में मेला भरता क्योंकि उन्हें हारा के सहारा के नाम से जाना जाता है

आज हम आपको बतायेंगे इनकी पूरी कहानी की इनका वास्तविक क्या नाम था और केसे ये श्याम बाबा बने और कलयुग में बाबा श्याम में लोगो की इतनी श्रधा केसे है तो चलिए आज की कथा शुरू करते है

बर्बरीक कौन था, barbarik in mahabharat katha
बर्बरीक कौन था

बर्बरीक कौन था महाभारत

माना जाता है महाभारत काल में भीम का पुत्र जोकि एक राक्षस जाति की लड़की से विवाह करने से एक पुत्र प्राप्त हुआ जिसका नाम घटोत्कच था और घटोत्कच के भी 1 पुत्र प्राप्त हुआ जिसका नाम बर्बरीक था

बर्बरीक की दादी हडिंबा थी बर्बरीक को जो भी शिक्षा दीक्षा प्राप्त हुई है वह हडिंबा के द्वारा प्राप्त हुई थी भीम की पत्नी हडिंबा थी वह श्री कृष्ण भक्त थी जब हडिंबा ने बर्बरीक को शिक्षा दी की आप श्री कृष्ण के सानिध्य में और उनकी भक्ति करें

तो बर्बरीक ने कहा कि श्री कृष्ण कौन है तो हडिम्बा ने बताया की श्री कृष्ण भगवान है और बर्बरीक ने यह भी अपनी दादी माँ से पूछा की किस तरह से आसानी से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं

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तो हडिम्बा ने कहा कि अगर भगवान के हाथों से मरना हो जाए तो मुक्ति तुरंत ही मिल जाती है इसलिए बर्बरीक ने यही सोचा कि श्री कृष्ण के हाथों से मरना है

इसलिए बर्बरीक ने यह विचार किया कि किस तरह से श्री कृष्ण के हाथों से मरना हो वह ऐसे तो किसी को नहीं मारते अगर उनसे मरना ही है तो क्यों ना उनके सामने खड़े होने लायक मैं शक्ति अर्जित करूं

इसलिए उन्होंने नवदुर्गा की भक्ति की और नवदुर्गा से बर्बरीक ने सारे अस्त्र-शस्त्र ग्रहण किए अस्त्र शस्त्र इतने शक्तिशाली थे कि अगर बर्बरीक चाहे तो वह कुछ भी कर सकता था

बर्बरीक को माता रानी के द्वारा 3 ऐसे बाण प्राप्त हुए जो की महाभारत के युद्ध को एक ही दिन में खत्म करने की शक्ति रखते थे अगर बर्बरीक द्वारा एक बाण भी चला दिया जाता तो वह संपूर्ण महाभारत का युद्ध खत्म कर सकता था

बर्बरीक तीनों महाभारत के युद्ध की ओर चला उनके मन में एक ही अभिलाषा थी

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कि श्री कृष्ण के द्वारा मुक्ति कैसे पाई जाए जब बर्बरीक महाभारत के युद्ध क्षेत्र के नजदीक पहुंचने ही वाले थे

कि उन्हें एक पंडित के भेष में भगवान श्री कृष्ण मिल गए जब पंडित ने बरबरी को यह पूछा कि तुम कहां जा रहे हो तो बर्बरीक ने कहा कि में महाभारत के युद्ध में शामिल होने जा रहा हु मेरे पास यह तीन बाण है एक तीर में भी इतनी शक्ति है

कि मैं महाभारत का युद्ध खत्म कर सकता हूं और मेरा यह प्रण है कि जो भी पक्ष हारेगा मैं उस तरफ से युद्ध करूंगा तो श्रीकृष्ण को यह पहले से ही मालूम था कि पांडव ही जीतेंगे अगर कोरव हारने लगे तो बर्बरीक उनकी तरफ हो गए

तो वह युद्ध ही समाप्त कर देंगे और पांडवों को भी खत्म कर देंगे इसलिए श्रीकृष्ण ने बर्बरीक का मस्तक अपने सुदर्शन चक्र से काट दिया

बर्बरीक का वध

जब श्रीकृष्ण को यह मालूम पड़ा के बर्बरीक है महाभारत युद्ध के लिए अकेले ही जा रहे हैं तो श्रीकृष्ण भी उनसे मिलने निकल पड़े

जब श्री कृष्ण बरबरी के पास पहुंचे तो उन्होंने एक ब्राह्मण का रूप बनाया और बरबरी के रथ के पास जाकर खड़े हो गए जब जब बर्बरीक ने ब्राह्मण को देखा तो वे रथ से उतरकर उन्हें प्रणाम किया और बोले के ब्राह्मण देवता आप कहां से हैं

तो ब्राह्मण ने कहा कि मैं सभी जगह रहता हूं लेकिन आप कहां जा रहे हो तो बनेगा कि मैं महाभारत का युद्ध जा रहा हूं और जो पक्ष हारेगा उसे में विजय बनाऊंगा ऐसा कहने पर श्री कृष्ण हंसने लगे उन्होंने कहा कि तुम किस प्रकार से हारे हुए पक्ष को विजय बना सकते हो

तो बर्बरीक ने कहा कि मेरे पास है नवदुर्गा की दी हुई शक्तियां हैं मेरे पास 3 तीर है 1 दिन में मैं पूरा युद्ध खत्म कर दूंगा तो

श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण के भेष में काकी तो इसका कोई प्रमाण तो बर्बरीक वहीं पर है खड़े हुए एक बरगद के पेड़ की ओर देखते हुए कहा कि यह पेड़ पर कितने पत्ते हैं तो श्रीकृष्ण ने कहा गणित मैं तब बर्बरीक ने कहा कि मैं एक ही देर से इस बरगद के सारे पत्ते भेज सकता हूं

तब श्री कृष्ण ने ब्राह्मण ने कहा कि करके दिखाओ जवाई बांध का संधान कर रहे थे तो तब श्री कृष्ण ने बरगद का एक पत्ता अपने हाथ में रख लिया और दूसरा पत्ता अपने पांव के नीचे रख लिया भगवान ने सोचा कि जो मेरी शरण में है उसे किस चीज की चिंता तब बर्बरीक ने बाण छोड़ा

और बरगद के सारे पत्ते एक ही बार में बंद डालें तब भगवान ने अपने हाथ और पांव के पत्ते देखे तो वह भी 6 दिन हो चुके थे तब तो भगवान ने सोचा कि बर्बरीक दोस्तों को विजय बनाएगा और पांडवों को खत्म कर देगा

तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक को चेतावनी दी और उन्हें कहा की वापिस लोट जाओ नही तो 

बर्बरीक
बर्बरीक

में आपको खत्म कर दूंगा तो बर्बरीक नही माना तो श्री कृष्ण को मजबूरी उनका सर काटना पड़ा 

आज हमने आपको बर्बरीक के बारे में बताया सम्पूर्ण रूप से बताया की बर्बरीक कौन था और किस प्रकार

वे बाबा श्याम के रूप में राजस्थान में प्रकट हुए और श्री कृष्ण से अमरता पाई असल में बर्बरीक का युद्ध महाभारत भाग लेने आये ही नही थे वे तो अपना कल्याण करने आये थे

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