aarti kunj bihari ki in hindi आरती कुंजबिहारी की लिखित

श्री कृषण आरती

aarti kunj bihari ki in hindi आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स हिंदी

  1. गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
    श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
    गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
    लतन में ठाढ़े बनमाली;
    भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
    ललित छवि श्यामा प्यारी की!

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की!
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की!

  1. कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
    गगन सों सुमन रासि बरसै,
    बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
    अतुल रति गोप कुमारी की!
    श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की!

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की!

  1. चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
    चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
    हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद;
    टेर सुन दीन भिखारी की!
    श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की!

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
बोलिए श्री कृष्ण भगवान की जय!! aarti kunj bihari ki

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जोकि भगवान के भक्तों की कथा से प्रेरित है भगवान श्री कृष्ण की आरती गाने से मन को तृप्ति मिलती है

और हमेशा आपका मन शांत रहता है इस संसार में शांत रहने के लिए आपको और कोई भी चीज नहीं मिल सकती

केवल भगवान के नाम में ही आप असीम शांति पा सकते हैं

और कोई भी ऐसी वस्तु नहीं है रुपया पैसा धन दौलत औरत संतान किसी ने भी आपको शांति प्राप्त नहीं हो सकती

केवल और केवल भगवान के नाम और उनके ध्यान और उनकी भक्तों की कथा में ही

आपको असीम शांति प्राप्त हो सकती है तो आज aarti kunj bihari ki in hindi आरती कुंजबिहारी की लिखित का पोस्ट इतना ही जय श्री कृष्णा

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