मंगलवार व्रत कथा आरती aarti bajrang bali ki

मंगलवार व्रत कथा आरती बोलो हनुमानजी महाराज की जय आज हम आपको हनुमानजी महाराज के आपको बतायेंगे

जो की हनुमानजी की व्रत कथा उनसे हमारे मन इच्छा फल प्राप्ति के फल के लिए है,

आप इस कथा में पढेंगे की हनुमानजी महाराज ने केसे बुढिया माई के संकटो का निवारण किया चलो पढ़ते है कथा बोलो राम दूत हनुमान की जय!

मंगलवार व्रत कथा आरती
मंगलवार व्रत कथा आरती

बुढिया माई की मंगलवार व्रत कथा aarti bajrang bali ki

एक बार एक नगर में एक बुढिया रहती थी उसकी भगवान हनुमानजी महाराज पर बड़ी ही श्रधा थी!


बुढिया माई के जब कोई सन्तान नही थी तो मंगलवार व्रत कथा के प्रताप के कारण ही उन्हें सन्तान हुई थी और उन्होंने अपने

लड़के का नाम मगलवार के दिन होने के कारण मंगलिया रखा था!बुढिया माई

हनुमानजी महाराज की बड़ी भक्त थी! बुढिया माई हर मंगलवार को जल्दी उठती और वर्त की त्यारी करती थी

और हमेसा मंगलवार व्रत के नियम रखती की मंगलवार के दिन मिट्टी नही खोदती और घर को कभी लिपती नही थी! (लीपना=पहले जब

कच्चे घर होते थे तो उन्हें गाय के गोबर और लाल मिट्टी से मिलाकर के दीवारों पर लेपन करना ही लीपना कहते है ) वह

मन और कर्म से हमेसा हनुमानजी महाराज का ध्यान करती थी! ( aarti bajrang bali ki )

मंगलवार के व्रत की कथा

एक बार मंगलवार के दिन जब उसका वर्त था तो बुढिया माई हमेसा की तरह ही जल्दी उठी और हनुमानजी की सेवा पूजा

अर्चना करी जब बुढिया माई की पूजा पूरी हुई तो हनुमानजी महाराज एक साधू का रूप धरके उसके घर के दरवाजे पर आकर

कहने लगे है कोई हनुमान भक्त जो मुझे भिक्षा देगा है ऐसा सुनकर बुढिया माई द्वार पर आई और कहने लगी हे साधू

महाराज बोलिए में आपकी सेवा किस प्रकार से कर सकती हु! तो साधू ने कहा की आप मुझे आपका आंगन लिपके दे में

मंगलवार व्रत कथा आरती
मंगलवार व्रत कथा आरती

भूखा हु भोजन बनाऊंगा तो बुढिया माई ने कहा की हे साधु महाराज में आपकी ये सेवा नही कर सकती क्योंकि आज मेरा

मंगलवार को वर्त है और में आज के दिन ना ही मिट्टी खोदती हु और ना ही आंगन लिपती तो क्रप्या करके ये इच्छा मुझसे

पूरी नही होगी में आपकी दूसरी कोई भी इच्छा हो पूरी कर दूंगी तो साधू महाराज ने कहा की क्या तुम इस बात का वचन

देती हो की दूसरी कोई भी बात पूरी करोगी तो बुढिया माई ने बिना सोचे समझे वचन दे दिया! तो साधू ने कहा ठीक है अब

साधु महाराज ने कहा की अपने लड़के को बुलाओ तो बुढिया माई ने बिना देर लगाये अपने बेटे को आवाज लगाई और

budhwar vrat katha

मंगलिया आ गया तो साधु ने कहा की में इसकी पीठ पर भोजन बनाऊंगा ये सुनकर बुढिया माई को बड़ा दुःख हुआ पर

उन्हों पहले वचन भी दिया था वे उन्हें रोक भी नही सकती थी लेकिन अभी हनुमानजी महाराज की परीक्षा पूरी नही हुई थी

साधु ने अब कहा की भोजन बनाने के लिए मुझे इसकी पीठ पर आग जलाकर दो तो बुढिया माई रोती हुई मगलिया की पीठ

पर आग जला दी और रोती हुई घर के अंदर चली गई अब थोड़ी देर बाद साधु ने बुढिया माई को आवाज लगाई की भोजन

बन गया है आ जाओ बुढिया माई और अपने लड़के को भी बुला लो तो बुढिया माई बड़ी ही दुखी हुई और कहने लगी की

साधु महाराज आप मेरे दुखी मान को और मात दुखाइए मेरा मगलिया के ऊपर मेने खुद ही अपने हाथो से आग लगाई है वो

केसे आएगा तो साधु महाराज के बार – बार कहने पर बुढिया माई ने अपने बेटे को आवाज लगाई मंगलिया…..! तो मंगलिया

घर में से दोड़कर आया और बोला हाँ माँ ये देखकर बुढिया माई बड़ी ही आश्चर्य चकित हुई और सोचने लगी की ये कोई

साधारण व्यक्ति नही है और साधु के पेरो में गिर पड़ी तभी साधु के भेस को हटाकर हनुमानजी महाराज ने बुढिया माई को

साखसात दर्शन दिए और बुढिया माई को सर्व सुख का आशीर्वाद दिया

इस तरह जो मंगलवार व्रत कथा सुनता है और कहता है उसे हनुमानजी महाराज की कृपा का फल जरुर मिलता है!

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